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ईशा फाउंडेशन के Save Soil अभियान को मिला महाराष्ट्र का साथ, सद्गुरु बोले, कृषि नीतियों को बदलना होगा

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने मार्च महीने में 100 दिन, 30 हजार किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा 'जर्नी टू सेव सॉइल' की शुरुआत की थी. सद्गुरु अपनी मोटरसाइकिल यात्रा की आधी दूरी तय कर चुके हैं.

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ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव की मुहिम मिट्टी बचाओ अभियान (Save Soil) को अब महाराष्ट्र सरकार का भी समर्थन मिल गया है. सेव सॉइल अभियान के समर्थन के तौर पर महाराष्ट्र ने समझौते पर हस्ताक्षर किया है. मुंबई के जियो कन्वेंशन सेंटर में इस कार्यक्रम के दौरान इस समझौते पर साइन हुए.

इस दौरान महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु के अलावा कई अन्य बड़ी हस्तियां भी मौजूद रहीं. कन्वेंशन सेंटर में करीब दस हजार लोगों की मौजूदगी में इस अभियान को महाराष्ट्र का समर्थन प्राप्त हुआ. 

कार्यक्रम में आदित्य ठाकरे ने कहा कि धरती हमारी साझा संपत्ति और जिम्मेदारी है और मुझे सद्गुरु के साथ मंच साझा करने और वैश्विक मंच पर ईशा फाउंडेशन की Save Soil पहल के लिए महाराष्ट्र की तरफ से समर्थन करके ख़ुशी महसूस हो रही है. इससे पहले, सद्गुरु ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सॉइल पॉलिसी किताब सौंपी. सीएम उद्धव ने भी 'मिट्टी बचाओ' के लिए पूर्ण समर्थन का वादा किया. 

सद्गुरु ने मिट्टी के लिए 100 दिवसीय बाइक यात्रा पर जाने के अपने फैसले के बारे में बात करते हुए कहा, '....बस यही रास्ता था कि अगर मैं अपनी जान जोखिम में डालता हूं तो कम से कम लोग खड़े होंगे और कुछ करेंगे.' सदगुरु ने कहा कि केवल 3 महीने पहले मिट्टी एक बहुत ही अलोकप्रिय विषय था, लेकिन उनकी यात्रा के बाद से 2.8 अरब लोगों ने इसके प्रति अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

आदित्य ठाकरे ने मिट्टी के लिए अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज हम एक महत्वपूर्ण चरण पर आ गए हैं और अगर हम इस पीढ़ी के लिए ऐसा नहीं करते हैं तो हम आने वाली पीढ़ी को भी नहीं देख पाएंगे. सद्गुरु के साथ अपनी बातचीत के बाद अपनी फीलिंग्स को शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि हम मिट्टी हैं, वहीं से आते हैं और अंतत: वहीं जाते हैं. इस कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेत्री जूही चावला ने कावेरी कॉलिंग फार्म की अपनी यात्रा और किसानों की किस्मत को बदलने वाली कृषि वानिकी को भी याद किया.



15-18 इंच मिट्टी को 'धरती की क्रीम' कहते हुए, सद्गुरु ने कहा कि पिछले 40-50 वर्षों में हमने ऊपरी मिट्टी का 52% हिस्सा खो दिया है जब मानव के उपभोग के वर्तमान स्तर के साथ यदि आप एक इंच मिट्टी को बनाना चाहते हैं, तो  इसमें 13000 साल लगेंगे. देश में अकाल की भयावहता से लाखों लोगों को बचाने वाली हरित क्रांति और उसके तरीकों का श्रेय देते हुए, सद्गुरु ने कहा कि हमारी कृषि नीतियों को बदलना होगा. उन्होंने कहा कि कोई भी एक व्यक्ति, एक बल या एक संगठन इस धरती को नष्ट करना नहीं चाहता है लेकिन हममें से हर कोई जाने-अनजाने इस विनाश में भागीदार है. ऐसे में सद्गुरु ने सभी से इसके समाधान में भागीदार बनने का आह्वान किया.



कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेत्री मौनी रॉय, दिव्यांका त्रिपाठी, ऋत्विक धनजानी सहित अन्य लोग मौजूद रहे. वहीं सद्गुरु ने मीत ब्रदर्स और खुशबू ग्रेवाल के साथ मिट्टी बचाओ गीत 'बंदेया' को अपनी आवाज दी. इसके अलावा सभी सेव सॉयल के सार्वजनिक कार्यक्रमों का एक आंतरिक हिस्सा, राधे जग्गी जो कि एक भरतनाट्यम डांसर हैं, ने शास्त्रीय नृत्य और कलारीपयट्टू की एक प्रस्तुति भी दी.

भारत में लगभग 30% उपजाऊ मिट्टी पहले ही बंजर हो चुकी है और उपज देने में असमर्थ है. मिट्टी बचाओ अभियान का मूल उद्देश्य, कृषि-भूमि में कम से कम 3-6 प्रतिशत जैविक तत्व होना सुनिश्चित करने के लिए सरकारों पर जोर डालना है. इसके बिना, पूरी कृषि-भूमि तेजी से खराब हो जाएगी और रेत में बदल जाएगी, जिसमें कोई फसल नहीं उग सकती, जिससे वैश्विक खाद्य और जल सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी. इससे पहले नई दिल्ली में एक मिट्टी बचाओ के कार्यक्रम में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सद्गुरु के साथ शामिल हुए और आंदोलन के लिए अपना तहे दिल से समर्थन और प्रोत्साहन व्यक्त किया. सद्गुरु ने प्रधानमंत्री को सॉइल पॉलिसी हैंडबुक भी दी जो व्यावहारिक, वैज्ञानिक समाधान प्रदान करती है. 

सद्गुरु के भारत आने के बाद से, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में मिट्टी बचाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है. अब तक यह अभियान 2.5 अरब लोगों तक पहुंच चुका है, जबकि 74 देश अपने देशों की धरती को बचाने के लिए कार्य करने पर सहमत हुए हैं. 27 देशों में सद्गुरु की यात्रा की शुरुआत के बाद से 2.8 बिलियन से अधिक लोगों ने मिट्टी के बारे में बात की है. 

 

 

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