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केमिकल फर्टिलाइजर्स का इस्तेमाल होगा कम, सरकार जल्द शुरू कर सकती है PM PRANAM योजना

हर महीने फर्टिलाइजर की जरूरत की मात्रा मांग के अनुसार बदलती रहती है. यह मांग फसल की बुवाई के समय पर आधारित होती है. उदाहरण के तौर पर, यूरिया की मांग जून-अगस्त की अवधि के दौरान सबसे ज्यादा होती है, लेकिन मार्च और अप्रैल में अपेक्षाकृत कम हो जाती है.

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PM PRANAM Yojana
PM PRANAM Yojana

PM PRANAM scheme: देशभर के किसानों के लिए एक अहम जानकारी है. दरअसल, केमिकल फर्टिलाइजर्स के इस्तेमाल को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई योजना PM PRANAM (पीएम प्रमोशन ऑफ अल्टरनेटिव न्यूट्रिशियंस फॉर एग्रीकल्चर मैनेजमेंट योजना) शुरू करने का प्लान बनाया है. प्रस्तावित योजना का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर सब्सिडी के बोझ को कम करना है, जिसके 2022-2023 में बढ़कर 2.25 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है. पिछले वर्ष के 1.62 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से यह 39% अधिक है.

'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का अलग बजट नहीं होगा और फर्टिलाइजर्स डिपार्टमेंट द्वारा संचालित योजनाओं के तहत मौजूदा फर्टिलाइजर सब्सिडी की बचत से वित्तपोषित किया जाएगा. वहीं, 50% सब्सिडी बचत को राज्य को अनुदान के रूप में दिया जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार, अनुदान का 70% वैकल्पिक उर्वरकों के तकनीकी अपनाने और वैकल्पिक रूप से संपत्ति निर्माण के लिए उपयोग किया जा सकेगा. बाकी बची हुई 30 फीसदी की अनुदान राशि का इस्तेमाल किसानों, पंचायतों, किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने के लिए किया जा सकता है. सरकार एक साल में यूरिया की वृद्धि या कमी की तुलना पिछले तीन वर्षों के दौरान यूरिया की औसत खपत से करेगी. 

हर महीने फर्टिलाइजर की जरूरत की मात्रा मांग के अनुसार बदलती रहती है. यह मांग फसल की बुवाई के समय पर आधारित होती है. उदाहरण के तौर पर, यूरिया की मांग जून-अगस्त की अवधि के दौरान सबसे ज्यादा होती है, लेकिन मार्च और अप्रैल में अपेक्षाकृत कम हो जाती है और सरकार इन दो महीनों का उपयोग खरीफ मौसम के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक तैयार करने के लिए करती है. कृषि और किसान कल्याण विभाग हर साल फसल के मौसम की शुरुआत से पहले उर्वरकों की आवश्यकता का आकलन करता है, और सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए रासायनिक और उर्वरक मंत्रालय को जानकारी देता है.

रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों, जिन्होंने पीएम प्रणाम योजना को लेकर विचार किया, ने राज्य सरकार के अधिकारियों को रबी अभियान के लिए कृषि पर राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित योजना के बारे में जानकारी साझा की. यह सम्मेलन 7 सितंबर को आयोजित किया गया था. मंत्रालय ने पीएम प्रणाम की विशेषताओं पर उनके सुझाव भी मांगे हैं. मंत्रालय ने प्रस्तावित योजना पर अंतर-मंत्रालयी चर्चा शुरू कर दी है. संबंधित विभागों के विचारों को शामिल करने के बाद इसका मसौदा तैयार किया जाएगा.

 

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