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बांस की खेती बेहद फायदेमंद, 40 साल तक कमा सकते हैं मुनाफा

राज कुमार पांडेय ने रिटायरमेंट के बाद बांस की खेती की शुरुआत की. पांडेय बताते हैं कि मैंने मध्यप्रदेश से भीमा बांस, कटिंगा, योलो वर्गरिक, टूडला प्रजाति की पौध मंगाई थी. उनके मुताबिक, अब उन्हें खासा मुनाफा हो रहा है.

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Farmer's Success Story
Farmer's Success Story

बुंदेलखंड जिले में पानी की बड़ी समस्या है. सिंचाई की कमी के चलते यहां फसल अच्छी नहीं होती है. जमीनें बंजर पड़ी रहती है. अगर किसी ने फसल लगा भी ली है तो उपज बेहद कम हासिल होता है. हालांकि, कई फसल ऐसी हैं जो कम बारिश वाले क्षेत्रों में लगाने पर बढ़िया मुनाफा दे जाती हैं. बांस की खेती करने वाले हमीरपुर जिले की मोदहा तहसील के भरसवा गांव के रहने वाले 62 वर्षीय प्रगतिशील किसान राज कुमार पांडेय ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है.

रिटायरमेंट के बाद शुरू की बांस की खेती

राज कुमार पांडेय एक सरकारी बैंक में क्षेत्रीय प्रबंधक के पद पर तैनात थे. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने बांस की खेती की शुरुआत की. पानी की कमी के चलते उन्हें खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा. राज कुमार पांडेय बताते हैं कि मैंने मध्यप्रदेश से भीमा बांस, कटिंगा, योलो वर्गरिक, टूडला प्रजाति की पौध मंगाई थी. बांस की इन प्रजाति के पौधे बेहद तेजी से विकास करते हैं. मुझे 10 हेक्टेयर में लागत 10 लाख रुपये लागत आई है. चार साल बाद पहली कटाई में अच्छा मुनाफा मिला है.

एक बार फसल लगाने के बाद 40 साल तक मुनाफा

बता दें कि बांस की फसल को एक बार लगाने के बाद लगातार इससे 40 वर्ष तक मुनाफा हासिल कर सकते हैं. हर कटाई के बाद इसके पेड़ अपने आप विकास करने लगते हैं. मार्केट की बात करें तो अगरबत्ती बनाने के साथ साथ अन्य कई बड़ी बड़ी कंपनियां खेत से बांस ले जाती और बढ़िया पैसे देती हैं.

जलस्तर में भी हुई काफी वृद्धि

राज कुमार पांडेय बताते हैं कि हमारे खेत में पहले 150 फिट पर पानी निकलता था. बांस की खेती शुरू करने के बाद जलस्तर में सुधार आया है. छोटे हैंड पम्प पानी देना बंद कर चुके हैं. अब मेरे खेत के आसपास उसमे काफी वृद्धि हुई है और जल में काफ़ी परिवर्तन हुआ है. साथ ही पर्यावरण को भी फायदा हुआ है.

 

 

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