17 Jun 2026
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रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय वर्कर्स अपने सिर, हाथ और पैरों पर सेंसर लगाकर काम कर रहे हैं, जिससे मशीनें उनके रोज़मर्रा के काम सीख सकें. आइए जानते हैं पूरा मामला.
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हज़ारों भारतीय वर्कर्स अपने रोज़ के काम को कैमरों और सेंसरों की मदद से रिकॉर्ड कर रहे हैं, ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोबोट्स को ट्रेनिंग के लिए डेटा मिल सके.
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रोबोट्स को ट्रेन करने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ डेटा है. इसके लिए लोग अपने सिर पर कैमरे लगाकर अपने काम को रिकॉर्ड कर रहे हैं.
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कई वर्कर्स के लिए यह काम उनकी नौकरी से ज़्यादा कमाई दे रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लोगों को रिकॉर्डिंग के लिए एक घंटे के ₹250 तक मिल जाते हैं.
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ह्यूमनॉइड रोबोट्स का बाज़ार तेजी से बढ़ रहा है. फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2050 तक दुनिया में 100 करोड़ से ज़्यादा रोबोट्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
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जहां कुछ वर्कर्स अपने घरों में काम रिकॉर्ड करते हैं, वहीं कई लोगों को खास स्टूडियो में बैठाकर एक ही काम बार-बार करवाया जाता है.
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कंपनियां सिर्फ वीडियो ही नहीं, बल्कि दूसरे तरह का डेटा भी रिकॉर्ड करती हैं. वर्कर्स के हाथों और पैरों पर मोशन सेंसर लगाए जाते हैं.
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यह टेक्नोलॉजी नई नौकरियां भी पैदा कर रही है, लेकिन कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में यह बड़ी संख्या में वर्किंग क्लास की नौकरियों को ख़तम कर सकता है.
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