पेपर बैलेट से स्मार्ट काउंटिंग रूम तक! जानिए कैसे भारत में बदली चुनाव के नतीजों की तस्वीर

4 May 2026

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पेपर बैलेट का समय

कई सालों तक वोटिंग के लिए लकड़ी के बॉक्स और पेपर बैलेट का इस्तेमाल होता था. इस तरीके में बहुत सारी गलतियां होती थीं. इसलिए भारत में डिजिटल काउंटिंग लाई गई.

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डिजिटल सिस्टम कब आया?

भारत में 1990 के दशक के अंत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल शुरू हुआ. इससे पेपर बैलेट और बॉक्स सिस्टम खत्म हुआ.

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कैसे काम करती है?

यह बैटरी से चलने वाली मशीन है, जो वोट डालने और वोट गिनने की प्रोसेस को आसान बनाती है. इसके आने के बाद से अब तक इसका इस्तेमाल लगातार हो रहा है.

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जनता का भरोसा जीता

इस तकनीक के आने के बाद लोगों का भरोसा बढ़ा. अब वोट डालने के बाद VVPAT (वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) से वोटर यह देख सकता है कि उसका वोट सही गया या नहीं.

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मशीन कितनी सुरक्षित है?

EVM को चुनाव के बाद सील्ड रूम में रखा जाता है और इसे इंटरनेट से दूर रखा जाता है. इस वजह से यह मशीन काफी सुरक्षित मानी जाती है और इसमें छेड़छाड़ करना आसान नहीं है.

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डिजिटल वोटर लिस्ट

सरकार ने पेपर वोटर लिस्ट को डिजिटल डेटाबेस में बदल दिया है. इससे डुप्लिकेट वोटर्स की पहचान और वेरिफिकेशन जल्दी हो पाता है.

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डिजिटल टूलकिट

रिटर्निंग ऑफिसर्स को स्मार्ट डिजिटल टूलकिट दी जाती है, जिसे ENCORE एप्लिकेशन कहा जाता है. इसके जरिए नामांकन और वोट काउंटिंग को मैनेज किया जाता है.

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लाइव डैशबोर्ड

डिजिटल पोर्टल के जरिए वोट काउंटिंग और ट्रेंड्स को रियल टाइम में दिखाया जाता है. इससे मीडिया और जनता को तुरंत जानकारी मिल जाती है.

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मॉडर्न काउंटिंग रूम

आज के काउंटिंग रूम में कंप्यूटर, हाई स्पीड इंटरनेट और मल्टी एंगल कैमरे लगे होते हैं. पहले जहां काउंटिंग में कई दिन लगते थे, अब वही काम कुछ घंटों में हो जाता है.

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