ना फटेंगे, ना टूटेंगे... ऐसे बनाएं चावल और मावा के अनरसा, बनेंगे जालीदार और फूले
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होली पर उत्तर भारत में कई जगह गुजिया के साथ अनरसा बनाने का भी रिवाज होता है. यह बहुत ही टेस्टी और अलग होता है.
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अनरसा एक ट्रैडिशनल मिठाई है जिसे बनाना एक कला माना जाता है क्योंकि अक्सर लोगों को शिकायत होती है कि तलते समय अनरसे फट जाते हैं या कड़क हो जाते हैं.
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लेकिन सही माप और मावा (खोया) के इस्तेमाल से आप इन्हें एकदम जालीदार और नरम बना सकते हैं.
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2 कप चावल जो 3 दिन भिगोकर रखे गए हों, जिन्हें बाद में सुखाकर पीसना होता है. साथ ही पिसी चीनी, 1 कप मावा, खसखस, किशमिश, चिरौंजी, देसी घी या फिर तेल.
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चावल के आटे में पिसी चीनी मिलाएं. इसे ढककर 5-6 घंटे के लिए छोड़ दें ताकि नमी से आटा बंधने लगे.
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अब इस मिश्रण में भुना हुआ मावा डालें. अगर मिश्रण बहुत सूखा लगे तो एक-दो चम्मच दूध डालकर इसका सख्त आटा गूंथ लें.
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आटे की छोटी लोइयां बनाएं. एक प्लेट में खसखस फैलाएं और लोई को उस पर रखकर हल्के हाथ से दबाते हुए चपटा करें. आटे में चिरौंजी और किशमिश भी मिला लें.
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कढ़ाई में घी गर्म करें. अनरसे को खसखस वाली साइड ऊपर रखकर धीमी आंच पर तलें. अनरसे को पलटा नहीं जाता.
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ऊपर से गरम घी कलछी से डालते रहें जब तक वह जालीदार और सुनहरा न हो जाए. जालीदार अनरसे तैयार हैं. इन्हें जाली वाली टोकरी में रखें ताकि अतिरिक्त घी निकल जाए.