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आज के दौर में जब हम अपनी सेहत को लेकर इतने जागरूक हैं तो सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि हम क्या खा रहे हैं, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि हम किसमें पका रहे हैं.
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बर्तन का धातु सीधे तौर पर भोजन के पोषण और उसके स्वाद को प्रभावित करता है.
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यहां हम आपके लिए स्टील, लोहे और एल्युमीनियम के बर्तनों की तुलना कर रहे हैं ताकि आप अपनी रसोई के लिए सही बर्तन का चुनाव कर सकें.
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लोहे के बर्तन (खासकर कढ़ाही और तवा) भारतीय रसोई की पहली पसंद रहे हैं. दुनिया भर के डॉक्टरों का कहना है कि इसमें खाना पकाने से भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ती है. इसलिए ये शानदार ऑप्शन है.
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इसमें खट्टी चीजें जैसे टमाटर की ग्रेवी, कढ़ी या नींबू वाली डिशेज नहीं पकानी चाहिए क्योंकि एसिड लोहे के साथ प्रतिक्रिया करके खाने को काला और कड़वा बना सकता है.
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स्टील एक नॉन-रिएक्टिव धातु है यानी यह खाने के साथ कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करता. इसमें आप कुछ भी पका सकते हैं. यह साफ करने में आसान और काफी टिकाऊ होते हैं.
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हालांकि स्टील के मामले में हमेशा भारी तले वाले बर्तनों का उपयोग करें क्योंकि हल्के स्टील में खाना जल्दी जल जाता है.
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एल्युमीनियम के बर्तन सस्ते और हल्के होते हैं इसलिए इनका इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है. लेकिन ये एक रिएक्टिव धातु है.
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जब हम इसमें खाना पकाते हैं तो एल्युमीनियम के अंश खाने में घुलकर हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं. लंबे समय तक इसका सेवन लिवर, किडनी और हड्डियों की बीमारियों का कारण बन सकता है. इसलिए इन बर्तनों का उपयोग कम से कम करें.
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खबर में बताई गई चीजें सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. अमल में लाने से पहले एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें.
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