टेनिस बॉल के अलग-अलग रंग क्यों होते हैं?

17 January 2026

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हममें से कईयों ने स्कूल के दिनों में लाल, पीले और हरे रंग के टेनिस बॉल से क्रिकेट खेली होगी. इनमें से कई बॉल काफी हल्के और कुछ भारी होते थे. 

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तब शायद ही किसी ने ध्यान दिया होगा कि क्या किस रंग की गेंद तेज होती है और किस रंग की स्लो. ऐसे में समझते हैं कि आखिर टेनिस बॉल अलग-अलग रंगों का क्यों होता है.

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यह एक ऐसी गेंद है जिसे विशेष रूप से टेनिस खेलने के लिए बनाया जाता है. ये फुर्सत में खेलने के लिए कई रंगों में उपलब्ध होती हैं, लेकिन संगठित आयोजनों के लिए ये चमकीले पीले रंग की होती हैं.

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इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (आईटीएफ) द्वारा आधुनिक टेनिस गेंदों का एक आकार, रंग और वजन तय किया गया. ऐसे में समझते हैं कि क्यों टेनिस बॉल अलग-अलग रंगों के होते हैं.

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आईटीएफ सिर्फ पीले और सफेद रंग के बॉल को मान्यता देता है. सबसे ज्यादा इसी रंग के टेनिस बॉल बनते हैं.

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1972 में एक स्टडी में बताया गया था कि इस रंग की गेद टीवी में ज्यादा विजिबल होते हैं. इसके बाद से इसका इस्तेमाल होने लगा.

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ऐतिहासिक रूप से सफेद या काले रंग की गेद का टेनिस में इस्तेमाल होता था. विम्बलडन सफेद बॉल का ही इस्तेमाल करता आया है. 1986 के बाद उसने भी पीले रंग को अपना लिया.

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शुरुआती दौर के खिलाड़ियों को लाल रंग की गेंद दी जाती है. क्योंकि, इसकी उछाल कम होती है और ये थोड़ा धीमा होता है. इसलिए उन्हें सीखने में मदद मिलती है.

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वहीं नारंगी रंग की गेंद लाल वाले से थोड़ा ज्यादा तेज होती है. इसकी उछाल भी थोड़ी ज्यादा होती है. इसलिए नए खिलाड़ियों इससे खेलने में जल्दी सीखते हैं.

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हरे रंग का टेनिस बॉल फास्ट होता है और इसकी उछाल भी ठीक-ठाक होती है. ये पीले टेनिस गेंद से बस थोड़ा सा स्लो होता है.

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