17 January 2026
Photo: Pixabay
हममें से कईयों ने स्कूल के दिनों में लाल, पीले और हरे रंग के टेनिस बॉल से क्रिकेट खेली होगी. इनमें से कई बॉल काफी हल्के और कुछ भारी होते थे.
Photo: Pexels
तब शायद ही किसी ने ध्यान दिया होगा कि क्या किस रंग की गेंद तेज होती है और किस रंग की स्लो. ऐसे में समझते हैं कि आखिर टेनिस बॉल अलग-अलग रंगों का क्यों होता है.
Photo: Pixabay
यह एक ऐसी गेंद है जिसे विशेष रूप से टेनिस खेलने के लिए बनाया जाता है. ये फुर्सत में खेलने के लिए कई रंगों में उपलब्ध होती हैं, लेकिन संगठित आयोजनों के लिए ये चमकीले पीले रंग की होती हैं.
Photo: Pexels
इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (आईटीएफ) द्वारा आधुनिक टेनिस गेंदों का एक आकार, रंग और वजन तय किया गया. ऐसे में समझते हैं कि क्यों टेनिस बॉल अलग-अलग रंगों के होते हैं.
Photo: Pexels
आईटीएफ सिर्फ पीले और सफेद रंग के बॉल को मान्यता देता है. सबसे ज्यादा इसी रंग के टेनिस बॉल बनते हैं.
Photo: Pexels
1972 में एक स्टडी में बताया गया था कि इस रंग की गेद टीवी में ज्यादा विजिबल होते हैं. इसके बाद से इसका इस्तेमाल होने लगा.
Photo: Pexels
ऐतिहासिक रूप से सफेद या काले रंग की गेद का टेनिस में इस्तेमाल होता था. विम्बलडन सफेद बॉल का ही इस्तेमाल करता आया है. 1986 के बाद उसने भी पीले रंग को अपना लिया.
Photo: Pixabay
शुरुआती दौर के खिलाड़ियों को लाल रंग की गेंद दी जाती है. क्योंकि, इसकी उछाल कम होती है और ये थोड़ा धीमा होता है. इसलिए उन्हें सीखने में मदद मिलती है.
Photo: Pixabay
वहीं नारंगी रंग की गेंद लाल वाले से थोड़ा ज्यादा तेज होती है. इसकी उछाल भी थोड़ी ज्यादा होती है. इसलिए नए खिलाड़ियों इससे खेलने में जल्दी सीखते हैं.
Photo: Pixabay
हरे रंग का टेनिस बॉल फास्ट होता है और इसकी उछाल भी ठीक-ठाक होती है. ये पीले टेनिस गेंद से बस थोड़ा सा स्लो होता है.
Photo: Pixabays