16 Jan 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
देश के उत्तरी भाग में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है. घना कोहरा आलू की फसल के लिए घातक हो सकता है. ऐसे में अगर आलू की पिछेती बुवाई की है तो फसल की सही समय पर देखभाल करनी चाहिए.
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कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए यूआईटी) के विशेषज्ञ ने एडवाइजरी जारी की है.
आलू की फसल में झुलसा रोग बहुत गंभीर बीमारी है, जो सर्दी और कोहरे में तेजी से फैलती है. वहीं, तापमान में गिरावट के कारण इस रोग के प्रकोप की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है.
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झुलसा रोग के लक्षणों की बात करें तो आलू की पत्तियों पर छोटी-छोटी बिंदी के रूप में बहुत सारे धब्बे दिखाई पड़ते हैं जो अलटरनेरिया की वजह से आता है.
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ऐसे में सायमोक्सनिल+मैंकोजेब 2.5 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी के दर से या एजोक्सीस्ट्रॉबिन+टीनूकोनाजोल 1 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी कि दर से घोल बनाकर छिड़काव करें.
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दवा का छिड़काव करते समय साफ पानी का प्रयोग करें. सुबह या शाम के समय ही सावधानी से छिड़काव करें.
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यह दवा मल्टी माइक्रोन्यूट्रिएंट नाम से पैकेट बाजार में उपलब्ध होते हैं. जिसमें (आयरन, कॉपर, जिंक, कैल्शियम, मलिबडनम, बोरान, क्लोरीन) आदि तत्व होते हैं. यह काफी हद तक उसे रोग का कंट्रोल कर लेते हैं.
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रोग को फैलने से रोकने के लिए फसल की सिंचाई करें और खेत में पानी न रुकने दें. संक्रमित पौधों को उखाड़कर नष्ट करें.
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