मार्च की गर्मी से गेहूं फसल पर संकट, एक्सपर्ट की मानें सलाह, समय पर करें सिंचाई 

25 March 2026

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

मार्च के महीने में ही गर्मी का प्रकोप शुरू हो चुका है. बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल पर संकट मंडराने लगा है.

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कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि अगर इस समय सावधानी नहीं बरती तो गेहूं के दाने कमजोर रह जाएंगे और पैदावार 15 से 25 प्रतिशत तक गिर सकती है.

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​आईसार्क (ISARC) के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह के अनुसार, गेहूं की पैदावार काफी हद तक बुआई के समय पर निर्भर करती है. 

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जिन किसानों ने 20 नवंबर के बाद बुआई की है, उनकी फसल अभी 'दूधिया अवस्था'  में है यानी इस समय दाने के विकास हो रहा होता है.

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अधिक तापमान दाने को समय से पहले सुखाकर सिकोड़ सकती है. ​बढ़ते तापमान के प्रभाव को कम करने के लिए सिंचाई के कुछ खास तरीके बताए गए हैं.

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एक्सपर्ट का कहना है कि फसल की सुरक्षा के लिए हर 20 दिन में रात के समय हल्की सिंचाई करते रहें. रात में सिंचाई करने से खेत की मिट्टी लंबे समय तक ठंडी रहती है और नमी बनी रहती है.

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दिन में चलने वाली तेज हवाओं के दौरान सिंचाई करने से गीली मिट्टी होने के कारण तेज हवा से फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाता है.

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​मार्च और अप्रैल के महीने गेहूं के दानों के वजन और आकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. अगर मिट्टी में पर्याप्त नमी हो तो दानों को धीरे-धीरे और पूरी तरह पकने में मदद करती है.

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जलवायु परिवर्तन के कारण अब हर साल मार्च में गर्मी बढ़ रही है. ऐसे में किसानों को अब 'क्लाइमेट स्मार्ट' खेती की ओर ध्यान देना होगा.

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समय पर बुआई और सिंचाई के आधुनिक प्रबंधन से ही नुकसान को कम किया जा सकता है. किसान मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार ही सिंचाई का निर्णय लें.

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