08 Jan 2026
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क
ठंड बढ़ने के साथ शीतलहर और पाले का खतरा बढ़ जाता है. कई राज्यों में तापमान सामान्य से नीचे है जिससे पाले की और संभावना बढ़ गई है.
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पाले का सबसे अधिक खतरा रबी फसलों को होता है जिसकी पत्तियां, फूल और तने मुरझा सकते हैं. इसे देखते हुए कृषि विभाग ने एडवाइजरी जारी की है.
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शीतलहर या पाला पड़ने की संभावना से एक दिन पहले हल्की सिंचाई करें. जिन क्षेत्रों में सुविधा उपलब्ध हो वहां स्प्रिंकलर सिंचाई को प्राथमिकता दें.
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शीतलहर और पाले से सुरक्षा में धुआं बहुत काम आता है. रात में खेत की मेड़ों पर सूखी घास, पुआल, कृषि अपशिष्ट जलाकर धुआं करें. इससे तापीय परत बनती है, जिससे पाले का प्रभाव कम होता है.
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सब्जी और नरम एवं मुलायम फसलों में पौधों की जड़ों के पास सूखी घास, भूसा या पॉलिथीन शीट बिछाएं. इससे मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है, जिससे फसल की जड़ें ठंड और पाले से बची रहती हैं.
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कृषि विभाग की ओर से किसानों सलाह है कि एक्सपर्ट की सलाह से रबी फसलों में 0.5% पोटाश (KNO₃) या 0.1% सल्फ्यूरिक एसिड का छिड़काव करें.
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खेत की मेड़ों पर उतर पूर्व की ओर पर्दे, झाड़ियां या फसल अवशेष लगाकर ठंडी हवा के प्रभाव को कम किया जा सकता है. शीतलहर और पाला में ठंडी हवाएं फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाती हैं.
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आलू, सरसों, चना, मटर और सब्जी फसलें पाले के प्रति अधिक संवेदनशील हैं. इन फसलों में अग्रिम सिंचाई और मल्चिंग जरूर किया जाना चाहिए ताकि उन्हें बचाया जा सके.
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