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बजट 2022

विनिवेश पर पीछे नहीं हटेगी सरकार, टारगेट पर है फोकसः निर्मला सीतारमण

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Union Budget 2022

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अपना चौथा बजट (Budget 2022) एक फरवरी को पेश करेंगी. पिछले बजट में सरकार का सबसे ज्यादा फोकस संकट से जूझ रही इकोनॉमी को उबारने, देश में विनिर्माण गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर रहा था.

स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं. वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान पिछले साल अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर आई और अब एक बार फिर कोविड तेजी से पांव पसार रहा है. ऐसे में स्वास्थ्य संकट की चुनौतियों से निपटने के लिए आगामी बजट में स्वास्थ्य संबंधी ढांचागत सुविधाओं के निर्माण पर ध्यान देने की विशेष जरूरत है. उम्मीद है कि इस बार सरकार जल जीवन मिशन, टीकाकरण और स्वास्थ्य संबंधी ढांचागत सुविधाओं पर बजटीय प्रावधान बढ़ाएगी.

वित्त वर्ष 2021-22 के लिए राजकोषीय घाटा 6.8 फीसद रहने का अनुमान रखा गया है. सरकार का खर्च भी बढ़ा है और विनिवेश के मोर्चे पर कोई बहुत अच्छी खबर नहीं है. ऐसे में सरकार के लिए 6.8 फीसदी राजकोषीय घाटा लक्ष्य को हासिल करना चुनौती रहेगा.

चुनौतियों के तौर पर वित्त वर्ष 2022-23 में ब्याज अदायगी 10 लाख करोड़ रुपये के पार कर जाने की आशंका है. वित्त वर्ष 2021-22 में सरकार ने इसके 8,09,701 करोड़ रुपये रहने का अनुमान रखा है.

अगर प्राथमिकताओं की बात की जाए तो बजट-2022 में बढ़ती खाद्य, उर्वरक सब्सिडी के साथ मनरेगा पर बढ़े हुए खर्च को काबू में लाना होगा. कोरोना महामारी की वजह से सरकार करीब 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मुहैया करा रही है, जिसमें 5 किलो गेहूं या चावल दिया जा रहा है. इस फैसले से खाद्य सब्सिडी बिल करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 4-4.25 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है.

पिछले बजट में सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. लेकिन सरकार इस लक्ष्य से अभी काफी दूर है. कामयाबी के तौर पर केवल एअर इंडिया का नाम है. जिसे सरकार ने 18 हजार करोड़ रुपये में टाटा ग्रुप को सौंपा है. इसके अलावा दूसरी कंपनियों से सरकार ने करीब 9,329.90 करोड़ रुपये जुटाए हैं. फिलहाल एक लाख करोड़ रुपये LIC के आईपीओ के जरिये जुटाने का प्लान है. अगर मार्च तक LIC का विनिवेश हो जाता है तो फिर ये आंकड़े बेहतर हो जाएंगे.

इस बीच खबर है कि बजट-2022 में विनिवेश का अब तक का सबसे बड़ा टारगेट दिया जा सकता है. आम तौर पर आर्थिक रूप से खस्ताहाल कंपनियों का विनिवेश करने पर जोर होता है. माना जाता है कि सरकारी हिस्सेदारी को प्राइवेट हाथों में बेचे जाने के बाद कंपनी मुनाफे की ओर बढ़ सकती है.

सरकार का इस बजट में भी खेती पर खास ध्यान रहने वाला है. कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन के लिए सरकार आगामी 2022-23 के बजट में कृषि ऋण (Agri Credit Target) के लक्ष्य को बढ़ाकर 18 लाख करोड़ रुपये कर सकती है. चालू वित्त वर्ष के लिए कृषि ऋण का लक्ष्य 16.5 लाख करोड़ रुपये है. सरकार हर साल कृषि ऋण के लक्ष्य को बढ़ा रही है. इसलिए उम्मीद है कि इस साल भी बढ़ सकती है.

रोजगार के घटते अवसर सरकार के लिए बड़ी चुनौती है. इसलिए केंद्र सरकार इस बजट में स्किल डेवलेपमेंट (Skill Development) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए विशेष पैकेज का ऐलान कर सकती है. देश को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं. इसके लिए इंडस्ट्री के अपग्रेडेशन और मौजूदा वर्कफोर्स की रीस्किलिंग के लिए बजट 2022 में विशेष पैकेज का ऐलान किया जा सकता है. खासकर सरकार का लॉजिस्टिक, हेल्थकेयर, टेक्सटाइल पर फोकस है.

बजट से पहले कई एक्सपर्ट का कहना है कि आयकर कानून की धारा-80(C) के तहत पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) की जमा पर मिलने वाली टैक्स छूट को डबल किया जाना चाहिए. फिलहाल सालाना 1.5 लाख रुपये तक की बचत पर टैक्स छूट मिलती है. लेकिन इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) ने इसे लेकर हाल में वित्त मंत्रालय को अपनी बजट-पूर्व सिफारिशें भेजी हैं और इस लिमिट को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने के लिए कहा है.

सैलरीड लोग आने वाले बजट 2022 में ‘वर्क फ्रॉम होम’ अलाउंस की उम्मीद कर रहे हैं. उन्हें महामारी के दौरान घर से ऑफिस का काम करने के लिए जो अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, उस पर सरकार से टैक्स में राहत की उम्मीद है. बजट में घर से काम कर रहे कर्मचारियों को 50,000 रुपये के वर्क फ्रॉम होम अलाउंस के रूप में अतिरिक्त डिडक्शन (Additional Deduction) का लाभ मिलना चाहिए.

कोरोना संकट की वजह से होस्पिटैलिटी, ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में हैं. यहां नौकरियों का बड़ा नुकसान हुआ है. इन सेक्टर्स को मदद की आस है. इसके अलावा इकोनॉमी की रीढ़ सूक्ष्म, छोटे और मध्य उद्योगों (MSMEs) भी सरकार से मदद की कतार में है.

इन सबसे के बीच Confederation of Indian Industry (सीआईआई) समेत तमाम जानकारों ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने पर जोर दिया है. क्योंकि मेडिकल इलाज के लिए खर्च अभी भी ज्यादा बना हुआ है. उनके मुताबिक सरकार को हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश जारी रखना चाहिए.